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यादों का कोहरा

मेरे प्यारे दोस्तों,
बहुत दिनों के बाद आज फिर अपने गाँव के स्कुल में बैठा था l स्कुल जैसे मुझसे कह रहा हो, मैं तुम्हारे बचपन के सभी यादों ओर अनुभवों को जीवंत रखा हुँ, छठवीं कक्षा को ही देख लो, कुछ भी तो नहीं बदला है, दीवारों का रंग भी नहीं बदला है l हाँ, थोड़ा बहुत जंग लगा हुँ l लेकिन दिवालों पर लिखे पहाड़े, जानवरों का चित्र जो मेरे सुंदर सफेद शरीर पर उकेरा हुआ   l

अब भी है, देख लो.... 
तुम गौर से क्या देख रहे हो ? ये तुम्‍हारा ही क्लास है, कुछ याद आया.. आया न.. बहुत गौर से देखो इन बेंचों को तुम्हारा बचपन शायद यहीं से शुरू हुआ था l देखो तुम किसको याद कर रहे हो l हाँ न, मुझसे तुम झूठ नहीं बोल सकते,तुम्हारे बहुत सारे दोस्त जो शायद अब यादों में सिमट के रह गए हैं l कभी मिलो तो उनसे कहना, तुम्हारा छठवीं कक्षा तुम्हें बहुत याद करता है l मुझसे बार बार पूछा करता है l बेंचों के ऊपर से जो दौड़ा करते थे, अब अपने जिन्दगी के दौड़ में कितने आगे निकल गए हैं l अरे हाँ! वो जो कोने में पुराना बेंच है, मुझसे कह रहा था,मेरे पीठ पर अब भी बहुत सारा नाम लिखा हुआ है l जिसे मिटा पाना मुश्किल है l कोई बात नहीं, तुम अपने जीवन में आगे बढ़ते रहो अपना मुकाम हासिल करो l कभी याद आऊँ तो एक बार पीछे पलट कर जरूर देखना l
       
©® नवीन किशोर  महतो 

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